लण्ड की प्यासी-3


प्रेषक : सुनील कश्यप

मुझे महसूस हुआ कि वह अब झड़ने वाली है। अब वह बोलने लगी- सुनील, मैं झड़ रही हूँ, हे भगवान् ! आह.. आआ... उम्म....ह्ह... सुनील मैं झड़ने वाली हूँ। और यह कहते हुए वह कुछ देर के लिए मछली की तरह तड़पने लगी।

अब मैंने उसके पैरों को थोड़ा फैलाया और लण्ड का सुपारा उसकी गर्म गीली चूत पर रख दिया और वह उम्म्म....उम्म्म.... करके सिसकारने लगी- सुनील, मत तड़पाओ ! लण्ड डाल दो ! मैं बहुत दिनों से लण्ड की प्यासी हूँ, प्लीज मेरी प्यास बुझा दो... अब बर्दाश्त नहीं होता्।

मैं उसको और तड़पाना चाहता था तो मैंने अपने लण्ड के सुपारे को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया और वह तड़पने लगी। तो मैंने उस पर रहम खाते हुए अपना लण्ड उसकी चूत में डालना शुरू किया। वह सिर्फ 4 बार चुदी थी तो मेरा लण्ड आसानी से नहीं जा रहा था उसकी चूत में तो मैंने थोड़ा धक्का लगाया तो वह चिल्ला उठी- आह्ह्ह धीरे डालो ! दर्द हो रहा है।

फिर मैंने लण्ड को बाहर निकाला और फिर एक जोरदार धक्का मारा और मेरा लण्ड 5 इंच अन्दर घुस गया और वह जोर से चीख पड़ी- अआह..... आआह्ह्ह.... जल्दी निकालो इसे ! बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने लण्ड को नहीं निकला और उसके ऊपर लेट गया, वह तड़प रही थी, मैं लण्ड को निकाल लेता तो उसे फिर से और दर्द होता।

फिर थोड़े देर के बाद उसको थोड़ा आराम महसूस हुआ और फिर मैंने अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू किया। अब 7-8 धक्कों के बाद मेरा 7 इंच का लण्ड उसकी चूत में पूरी तरह घुस गया और आसानी से अन्दर-बाहर होने लगा।

उसे दर्द तो हो रहा था पर कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगा और वह भी अब आहें भर भर कर चुदवाने लगी मुझसे। अब मैंने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और उसे जोर जोर से चोदने लगा, पूरा कमरा हम दोनों की सिसकारियों से गूंज रहा था। वह भी अपनी कमर उछाल उछाल कर मुझसे चुदवा रही थी। उसे बहुत मजा आ रहा था और मैं भी बहुत मजे कर रहा था, आखिर ऐसी लड़की कहाँ बार-बार मिलती है।

अब मैंने धक्कों की रफ़्तार थोड़ी कम की तो वह बोली- अब मत रुको प्लीज ! और जोर से डालो अपना लण्ड ! आज जी भर के मुझे चोदो ताकि यह दिन मैं हमेशा याद रख सकूँ !

और मैंने वैसा ही किया, मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और वह और जोर से सिसकारने लगी- आह्ह्ह... आ आह.. उफ्फ... तुम बहुत अच्छा चोदते हो सुनील आह्ह्ह.. आ... मेरे बॉयफ्रेंड ने कभी ऐसी चुदाई नहीं की मेरी ! उम्म..... आआह्ह... और जोर से चोदो उम्म्म... उम्म्म...

करीब दस मिनट की चुदाई के बाद वह 2 बार झड़ चुकी थी जिससे उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी और कमरे में फच्च फ़च्छ की आवाजें आ रही थी।

अब मैं अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था और झड़ने वाला था, मैंने रोशनी से कहा- मैं झड़ने वाला हूँ !

तो उसने कहा- मैं प्रेग्नेंट नहीं होना चाहती, प्लीज मेरे अन्दर मत झड़ना।

मैंने अपने लण्ड निकाला और उसके पेट पर सारा माल निकाल दिया फिर उसने पूरे वीर्य को अपनी पेट पर तेल की तरह मल लिया और मेरे लण्ड से जो पानी टपक रहा था, वह सब चाटने लगी।

मैं उसके बगल में लेट गया और हम दोनों प्यार भरी बातें करने लगे।

कुछ देर बाद फिर वह मेरे लण्ड को पकड़ने लगी और मैं उसके स्तनों को पकड़कर मसल रहा था। इतनी मेहनत के बाद हम बहुत थक चुके थे लेकिन हम दोनों में जोश इतना था कि वह मेरे लण्ड को सहला रही थी और मैं उसको।

फिर वह उठी और मेरे लण्ड की तरफ पलटी और फिर उसने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

उसके मुँह का स्पर्श पाते ही मेरा लण्ड एक बार फिर खड़ा हो गया और एक बार फिर हम एक और राउंड के लिए तैयार हो गए। इस बार मैंने रोशनी को घोड़ी की तरह बनने के लिए कहा और वह घुटनों के बल झुक गई। अब मैंने उसकी पीठ को थोड़ा किस किया और फिर अपना लण्ड उसकी चूत में पीछे से डाल दिया। इस बार मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत में चला गया और मैं उसकी कमर को पकड़ कर उसकी चूत में अपना लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा।

हाय क्या मजा आ रहा था इस स्टाइल में उसको चोदने का ! एक तो उसके गांड शेप में थी तो उसकी गांड देख देखकर मेरा लण्ड और टाईट होता जा रहा था। अब मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार तेज की और उसकी चूत को जोर जोर से चोदना चालू किया और वह आआ उफ्फ्फ...अह की आवाजें निकालने लगी। मैं बीच में रुकता, उसकी पीठ को चूमता और फिर शुरु हो जाता ! बहुत मजा आ रहा था हम दोनों को ! सच में जब दोनों लोग एक्सपर्ट हों तो सेक्स करने का मजा ही कुछ और होता है।

करीब 15 मिनट के बाद मैं फिर से झड़ने वला था और इस दौरान वह भी झड़ चुकी थी। उसकी चूत में से पानी बह रहा था और मेरा लण्ड एकदम रॉकेट की तरह उसकी चूत से आर पार हो रहा था।

अब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने कहा- रोशनी, मैं झड़ने वाला हूँ, यह तुम्हारी चूत बहुत गर्म है, मेरे लण्ड का सारा पानी पी ले रही है उफ...उम्म... उम्म....उम्म...

तो वह भी बोल पड़ी- मेरी चूत तुम्हारे लण्ड का रस पीने तो आई है, कितने दिनों से प्यासी थी मेरी चूत तुम्हारे जैसे एकदम सोलिड लण्ड का पानी पीने के लिए।

तो इस बार मैंने अपना सारा पानी उसकी गांड पर गिरा दिया और फिर उसने मेरे वीर्य से अपनी गांड की मालिश कर ली।

अब हम दोनों एकदम थक चुके थे और सो गए।

कब शाम के 6 बज गए कुछ पता ही नहीं चला। हमारी नीद भी तब खुली जब उसकी दोस्त का फ़ोन आया।वह उसके बारे में पूछ रही थी कि वह आज क्लास में नहीं आई, इतनी देर हो गई कहाँ है।

तो उसने कहा कि उसकी दोस्त आई हुई थी उसके शहर से, वह एक होटल में ठहरी है तो उसके साथ ही थी।

फिर उसने जाने की तैयारी की और अपने कपड़े पहनने लगी। थोड़ी देर बाद वह कपड़े पहन कर तैयार हो गई और मेरे पास आई। तब तक मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे।

फिर उसने मुझे एक बहुत ही प्यारा चुम्बन किया। मैं उसको छोड़ने बाहर उसके साथ निकला। फिर रास्ते में मैंने उसे कॉफ़ी पीने के लिए कहा तो पहले उसने मना किया पर मेरे जोर देने के बाद वह मान गई। हमने एक होटल में कॉफ़ी पी, थोड़ी बातें की, फिर वह रिक्शा करके चली गई।

फिर अगले दिन वह फिर होटल आई और फिर हमने पूरी दोपहर एन्जॉय किया।

तो इस तरह लण्ड की प्यासी रोशनी ने अपनी प्यास बुझाई।

हम दोनों अभी भी छुट्टियों में मिला करते हैं और सेक्स को एन्जॉय करते हैं।

मुझे उम्मीद है कि आपको मेरे कहानी पसंद आई होगी। अपने विचार मेल करें।

sunil_4u1@hotmail.com

लण्ड की प्यासी-2


प्रेषक : सुनील कश्यप

मैं कुछ देर तक उसके होंठों को चूमता रहा और चूचियों को दबाता रहा और वह बस ऊम्म्म.... उफ्फ...उम्म की आवाजें निकालती रही। फिर मैंने उसके टॉप को और उसकी जींस को उसके बदन से अलग किया। उसने काली ब्रा-पैंटी पहन रखी थी जो उसके गोरे बदन पर एकदम कमाल लग रही थी। उसने अब मुझे बेड पर लिटा दिया, मेरे ऊपर आ गई और मेरे कपड़े निकलने लगी।

मैंने पैंट और शर्ट पहनी हुई थी। उसने मेरे शर्ट को निकाला और मेरी छाती पर हाथ फेरते हुए एक चुम्बन किया। उसके ऐसा करते ही मेरे बदन में मानो कर्रेंट दौड़ गया हो, मेरी पूरी काया हिल गई। फिर उसने मेरे पेट पर चुम्बन किया जिससे मेरा तन लेफ्ट-राईट होने लगा।फिर उसने मेरे शर्ट को पूरी तरह जुदा कर दिया मेरे जिस्म से और मेरी पैंट को खोलने लगी। पहले तो उसने बेल्ट खोली, फिर पैंट का हुक खोला और फिर चैन को खोलते हुए मेरे पैंट को निकाल फेंका, अब मैं अन्डरवीयर में था और वह ब्रा-पैंटी में।

मेरे कपड़े निकलने के बाद रोशनी एक बार फिर मेरे होंठों को चूसने लगी। वह अपना एक हाथ मेरे पेट और छाती पर घुमा रही थी। उसके ऐसा करने से मुझे एक अजीब गुदगुदी और मजा आ रहा था। वह एक अनुभवी की तरह सब कुछ कर रही थी। फिर मेरे होंठों को चूमते हुए उसने अपना हाथ मेरे अन्डवीयर में डाल दिया और मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी।

उसके हाथों का एहसास पाते ही मेरा लण्ड फनफना कर खड़ा हो गया और मेरे मुँह से उफ्फ्फ्फ़..... की आवाज निकल गई।

अब उसके होंठ मेरे होंठ से सटे पड़े थे और उसके हाथ मेरे लण्ड को सहला रहे थे जिससे मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और उसकी चूत की प्यास बुझाने के लिए एकदम तड़प रहा था। अब वह मेरे होंठों को चूमती हुई नीचे सरकने लगी, मेरी छाती को चूमा और फिर कुछ देर मेरे पेट को चूमा और फिर मेरे अन्डवीयर से मेरे लण्ड को निकाल कर देखने लगी। मेरा 7 इंच का लण्ड देखकर उसके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी। उसने मेरा लण्ड को थोड़ा सहलाया थोड़ा ऊपर नीचे किया और फिर मेरे लण्ड के सुपारे को धीरे धीरे अपने मुँह में लेकर चाटने लगी। वह बहुत ही धीरे धीरे मेरे सुपारे को चाट रही थी और मैं एकदम से आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो रहा था, मेरे मुँह से बस उफ्फ्फ उफ आह्ह की आवाज निकल रही थी। वह एक बहुत अच्छी लण्ड-चुसू थी, कुछ देर मेरे सुपारे को चाटने के बाद उसने मेरा पूरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं तो एकदम स्वर्ग में पहुँच गया था मुझे तो इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊँ ! अब वह मेरे लण्ड को अपने हाथों में लेकर हिला हिला कर चूस रही थी मानो उसको बहुत दिनों के बाद लोलीपोप मिला हो !

हाय बहुत मजा आ रहा था ! मेरा लण्ड तो झटके मार रहा था, मेरे लण्ड में तो तूफ़ान मचा हुआ था और उसकी जीभ मेरे लण्ड को और उत्तेजित कर रही थी।मुझे तो उस वक़्त परम सुख का आनन्द हो रहा था मेरे मुँह से बस यही शब्द निकल रहे थे- रोशनी, आज तुमने मुझे खुश कर दिया है, तुम बहुत अच्छे से मेरे लण्ड को चूस रही हो, मेरे सुपारे को धीरे धीरे प्यार से चाटो मेरी जान ! उफ्फ्फ... बहुत मजा दे रही हो तुम ! मेरे लण्ड को अच्छी तरह चाट डालो उम्म्म...

करीब दस मिनट तक वह मेरे लण्ड को चाटती रही और मैं उसके बालों को सहलाता रहा था। फिर मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने रोशनी से कहा- मैं झड़ने वाला हूँ !

लेकिन वह इतनी मस्त थी मेरा लण्ड चूसने में कि उसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था, वह मेरे लण्ड को लोलीपोप की तरह चूसे जा रही थी और मैं एकदम चरम सीमा पर पहुँच गया था, मैंने जोर से कहा- रोशनी, मैं झड़ने वाला हूँ !

तो उसने कहा- झड़ जाओ जान ! मुझे तुम्हारा पूरा रस पीना है !

यह बोलकर वह फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी। अब मैं कण्ट्रोल से बाहर था और वह मेरे लण्ड को चूसे जा रही थी। फिर कुछ देर बाद मेरे लण्ड में वीर्य भर गया और मैंने एक जोर की पिचकारी उसके मुँह में मार दी, जिससे वह थोड़ा पीछे हटी तो थोड़ा पानी उसके मुँह में और थोड़ा बाहर गिर गया लेकिन जीतना उसके मुँह में था उसने वह सारा अन्दर गटक लिया।

पिचकारी मारने के बाद मेरा लण्ड थोड़ी देर के लिए सो गया तो वह फिर से मेरे लण्ड के साथ खेलने लगी, उसे हिलाने लगी और मेरे सुपारे को चाटने लगी।

फिर 5 मिनट बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया अब उसने मेरे लण्ड के पानी को पूरी तरह साफ़ कर दिया था और उसकी लण्ड चुसाई की वजह से मेरा लण्ड एकदम चिकना हो गया था।

अब मैं उठ कर बैठ गया, उसको बेड पर लिटा दिया और उसके होंठों को चूमने लगा। फिर मैंने उसकी ब्रा को उसकी चूचियों से अलग किया जिससे उसकी चूचियाँ बाहर आ गई ! हाय ! क्या चूचियाँ थी उसकी ! एकदम गोल ! ना ज्यादा बड़ी ना छोटी ! एकदम सख्त ! उसकी गोल चूचियाँ एकदम फूली हुई थी और निप्पल एकदम नुकीले हो चुके थे।

मैंने उसकी चूचियों पर अपना चेहरा रख दिया और निप्पल चूसने लगा और एक हाथ से उसके एक स्तन को मसलने लगा। मेरे ऐसा करने से वह उफ... उम्म.. उम...उफ्फ..आह्ह्ह... उफ्फ.... की आवाजें निकालने लगी और अपने पैरों को एक दूसरे से रगड़ने लगी। अब मैं उसके निप्पल को चूस रहा था और उसके चूचियों को मसल रहा था और वह मेरे बालों को सहला रही थी। यह सिलसिला करीब 5 मिनट चला फिर उसके पेट को चूमते हुए उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चूम लिया।

वह जोर से आह्ह्ह... करके चिल्ला उठी। अब मैंने उसको उलटा लेटा दिया और उसके पीठ को धीरे धीरे चाटने और चूमने लगा। फिर उसके कूल्हों की तरह बढ़ा। हाय रे ! उसके चूतड़ कितनी गोल थी उसके चूचों की तरह।

फिर मैंने उसकी पैंटी को थोड़ा सरकाया और उसके कूल्हे पर किस किया और वह एकदम से अपने गांड हिलाने लगी जैसे उसको कोई करेंट दे रहा हो। मैं उसकी गांड को चूमता हुआ उसकी जांघों को चूमने लगा।उसे बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी और हम दोनों की आह्ह्ह... उफ्फ... उफ्फ्फ.. उम्... की आवाजों से पूरा कमरा गूंज रहा था।

मैं उसकी जांघों को चूमता हुआ उसकी एडियों तक पहुँच गया और उसके पैरों की उंगली को अपने मुँह में लकर चूसने लगा। वह तो पागल सी हो गई और जोर से उम्म... अआहह... जैसी सिसकारियाँ भरने लगी। अब मैंने अपने खड़े लण्ड को उसकी जांघों के बीच रख दिया और उसके ऊपर लेट गया, उसके कूल्हे फ़ूले हुए थे जिससे मेरा लण्ड थोड़ा छुप सा गया उसकी गांड में। अब मैंने अपने लण्ड को उसकी गांड के बीच रगड़ना शुरू किया और उसकी पीठ पर हल्का हल्का सा किस करता रहा और वह तो मानो एकदम बहकती जा रही थी। थोड़ी देर बाद फिर से मैंने उसको सीधा लिटा दिया, अब मैं थोड़ा ऊपर गया और उसकी नाभि में अपने जीभ को धंसाना शुरु किया। उसे बहुत मजा आ रहा था। मैं अपने एक हाथ से उसकी पैंटी के ऊपर रखके चूत को रगड़ने लगा। वह तो एकदम पागल हो गई और अपनी गांड उठा उठा कर ऊपर-नीचे करने लगी।

फिर मैंने देर न करते हुए उसकी पैंटी को भी उससे अलग कर दिया और उसके पैरों को थोड़ा फैलाया।

हाय क्या चूत थी यारो ! एकदम क्लीन शेव्ड पूरी गुलाबी और गीली !

उसकी चूत कसी हुई थी जिसे देखकर अच्छों अच्छों की लार टपक जाए और मेरे साथ भी वैसा ही हुआ। उसकी चूत को देखकर मेरे लण्ड से और मेरे मुँह से लार टपकने लगी।

फिर मैंने उसके पैरों को थोड़ा और फैलाया और अपना चेहरा जांघों के बीच डाल दिया और उसके गीली योनि को चाटने लगा। मेरे ऐसा करने से उसको बहुत मजा आ रहा था और मुझे उसकी चूत की गंध और स्वाद से बहुत ज्यादा सेक्स चढ़ रहा था। मैंने उसकी चूत को अब चाटना शुरू किया और एक हाथ से उसकी भगनासा को रगड़ना शुरू किया, वह अपनी कमर को हवा में उछालने लगी, मानो एकदम से कण्ट्रोल खो दिया हो उसने !

अब मैं उसकी योनि में अपनी जीभ को नुकीला करके डाल रहा था और वह जोर जोर से बोल रही थी- आह्ह...उम्म्म... उम... आह्ह... उफ्फ.. उम्म... सुनील बस करो, अब कण्ट्रोल नहीं होता प्लीज ! अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दो ! मुझे मत तड़पाओ इस तरह !मैं उसे और थोड़ा गर्म करना चाहता था तो मैंने अपना काम जारी रखा। अब वह बड़बड़ा रही थी- आय लव यू सुनील ! आज मुझे चूत चटवाने का असली मजा मिला है, तुम बहुत अच्छे से मेरी चूत को चूस रहे हो उम्म्म... उम्म...उफ्फ...उम्म...

मुझे महसूस हुआ कि वह अब झड़ने वाली है। अब वह बोलने लगी- सुनील, मैं झड़ रही हूँ, हे भगवान् ! आह.. आआ... उम्म....ह्ह... सुनील मैं झड़ने वाली हूँ। और यह कहते हुए वह कुछ देर के लिए मछली की तरह तड़पने लगी।

कहानी जारी रहेगी।

sunil_4u1@hotmail.com

लण्ड की प्यासी-1


प्रेषक : सुनील कश्यप

दोस्तो, मेरा नाम सुनील कश्यप है, मैं मुंबई में रहता हूँ।

जिन लोगो ने मेरी कहानियाँ

प्यासी की प्यास बुझाई

और

पड़ोसन को गर्भवती किया

पढ़ी होगी उन्हें मेरे बारे में जानकारी होगी। मुझे आप लोगों के ढेर सारे इमेल मिले और मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि आपको मेरी कहानियाँ बहुत पसंद आ रही हैं।

बस आपका यही प्यार और उत्साह मुझे अन्तर्वासना पर अपने जीवन के सेक्स-अनुभव लिखने के लिए प्रेरित करता है।

आगे बढ़ते हुए जो पाठक मेरे बारे में नहीं जानते है मैं उनको बताना चाहूँगा कि मैं 23 वर्षीय युवक हूँ और मुंबई में अपने परिवार के साथ रहता हूँ। सेक्स करना और उसके बारे में लिखना, यह मेरी रुचि है।

मैं दुनिया में हर चीज के बगैर रह सकता हूँ लेकिन कोइ कह दे कि मैं सेक्स के बिना रह जाऊँ तो मेरे लिए यह नामुमकिन है। अब तो सेक्स मेरे लिए एक नशे की तरह हो गया है। मैंने हर उम्र की लड़कियों और औरतों के साथ सेक्स किया है, कुछ हाई प्रोफाइल लड़कियाँ होती हैं, उनकी भी प्यास मैंने बुझाई है। कुछ औरतें जो शादी के बाद अपने पति से नहीं खुश रह पाती, उनकी प्यास भी मैंने बुझाई है। और कुछ जो संतान इच्छुक होती हैं, मैंने उनको संतान सुख भी दिया है।

मैं 23 साल की उम्र में ही बहुत सारी स्त्रियों के साथ सेक्स कर चुका हूँ, इतनों के साथ कि मैं खुद नहीं जानता।

दोस्तो, मैं आप लोगों को बोर न करता हुआ एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात बताना चाहूँगा कि अगर आप किसी धन्धे वाली के साथ सेक्स कर रहे हो तो प्लीज कम से कम तीन कंडोम लगाएँ, अगर लड़की पेट से हो तो उसके स्तन ना चूसें, कभी चूत को ना चाटें क्यूंकि ऐसा करने से एड्स होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

मेरा 6 फ़ुट का कद और कसे हुए बदन को देख कर हर कामुक लड़की के मुँह से आह निकल जाती है। जब मैं बाहर घूमने के लिए निकलता हूँ तो काफी लड़कियों की नजर मुझ पर रहती है लेकिन मैं उनको अनदेखा करता हुआ अपने काम से मतलब रखता हूँ।

आज मैं आपको अपनी तीसरी कहानी लंड की प्यासी रोशनी के बारे में बताने जा रहा हूँ।

यह करीब 8 महीने पहले की बात है जब मेरी दूसरी कहानी प्यासी की प्यास बुझाई अन्तर्वासना पर प्रकाशित हुई थी और तब मुझे बहुत से मेल मिले थे और उनमें से ही मेरी एक पाठिका थी रोशनी।

रोशनी पुणे में स्वारगेट के करीब एक पोश एरिया में किराये के कमरे में अपनी दो सहेलियों के साथ रहती थी। वह मुझसे करीब 2 साल बड़ी थी और पुणे में अपना एम.बी.ए कम्प्लीट करने के लिए आई हुई थी। रोशनी अन्तर्वासना की नियमित पाठिका थी और उसे अन्तर्वासना की कहानियाँ बहुत पसंद आया करती थी, जिन्हें पढ़ पढ़ कर वह अपनी चूत में उंगली डालकर अपनी चूत की प्यास बुझाया करती थी।

जब मेरी कहानी प्रकाशित हुई तो रोशनी ने मेरी कहानी पढ़ी और उसे मेरी कहानी बहुत पसंद आई। उसने मुझे मेल भेजा कि मेरा नाम रोशनी है, मुझे आपकी कहानी बहुत पसंद आई और मैं आपसे दोस्ती करना चाहती हूँ।

तो मैंने उसको अपनी जीमेल की आईडी से ईमेल कर दिया और कहा यह मेरी मेन आईडी है इसे ऐड कर लेना।

मेल आने के तीन दिन बाद वह मुझे रात को 11 बजे ऑनलाइन मिली। उसने मुझे बताया कि उसने मेरी कहानी पढ़ी और उसे बहुत पसंद आई। मैंने भी उसे मेरी कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद दिया। फिर उसने मेरे बारे में पूछा और मैंने उसके बारे में, उसकी लोकेशन, जॉब वगैरा वगैरा।

तो उसने बताया कि वह पुणे में हॉस्टल में रहती है और एम.बी ए कर रही है। फिर हम दोनों ने उस दिन ढेर सारी बातें खुल कर की सेक्स, ओर्गास्म और उत्तेजना के बारे में।

उसको मेरे बात करने और सेक्स के बारे में अच्छी तरह बताने का अंदाज बहुत पसंद आया फिर थोड़ी देर बाद वह दोबारा मिलने का आसरा देकर मेरी तारीफ करके चली गई ऑफलाइन।

फिर दूसरे दिन वह रात को 10 बजे मिली। इस बार हमने 5 मिनट इधर उधर की बातें की, शायद आज वह हिचकिचा रही थी और मेरे साथ पूरी तरह खुलकर बात नहीं कर पा रही थी तो मैंने उससे पूछ लिया कि तुमने मुझसे सेक्स के प्रति तुम्हारी रुचि के बारे में तो बता दिया लेकिन अपने सेक्स अनुभव के बारे में नहीं बताया।

तो वह बोली- मेरा सेक्स अनुभव कुछ ख़ास नहीं है।

मैंने उससे पूछा- कितनी बार सेक्स किया है?

तो उसने बताया कि उसने चार बार अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स किया था लेकिन उसका अब ब्रेकअप हो गया है उसके बॉयफ्रेंड के साथ और करीब 5 महीने से उसने सेक्स नहीं किया है। मैंने उससे उसके बॉयफ्रेंड के साथ किये सेक्स के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसका बॉयफ्रेंड जल्दी झड़ जाता और थक जाता था और उसकी प्यास अधूरी रह जाती थी।उसकी यह बात सुनकर मैंने थोड़ा दुख जाहिर किया। दोस्तो, हर लड़की की यह चाहत होती है कि उसकी सेक्स लाइफ बहुत सुख की हो, उसका बॉयफ्रेंड और पति उसे पूरी तरह संतुष्ट कर सके लेकिन बहुत बार ऐसा होता है कि लड़के संतुष्ट हो जाते हैं, लड़कियों की प्यास अधूरी रह जाती है और वे अपनी प्यास को जाहिर भी नहीं कर पाती हैं, उनमें से ही एक थी रोशनी।

करीब एक हफ़्ते की बातचीत के बाद अब रोशनी से मेरा सम्बन्ध और बढ़ने लगा, अब हम दोनों और खुल कर बातें करने लगे थे।मैं उसको अपने सेक्स-अनुभव बताया करता था कि मैं कैसे सेक्स करता हूँ, कैसे लड़कियों को उत्तेजित करता हूँ, कैसे उनको जिंदगी का मजा देता हूँ, और वह मेरे बातों पर ध्यान लगा कर गौर करती थी, कुछ हद तक वह मेरे सेक्स करने के तरीके से काफी प्रभावित हो गई थी।

कुछ दिनों में हमने अपने नंबर भी एक दूसरे के साथ शेयर कर लिए, अब हम फ़ोन पर ही घंटों बातें किया करते थे, मैं उसे फ़ोन पर ही सेक्सी बातें करके उत्तेजित कर देता था और वह मुझे अपनी बातों से मूठ मारने पर मजबूर कर देती थी। हम दोनों अब एक दूसरे को मिलने के लिए बेताब थे लेकिन हमारी कुछ जम नहीं रही थी, एक तो वह पुणे में रहती थी और मैं यहाँ मुंबई में ऑफिस में काम में रहता था।

लेकिन दोस्तो, कहते हैं न कि भगवान् के घर देर है पर अँधेर नहीं !

एक दिन मैं ऑफिस से घर आया और मैं फ्रेश होकर टी.वी देखने के लिए बैठ गया, तभी मेरे सीनियर का फ़ोन आया, उसने कहा कि मुझे तीन दिन के लिए पुणे जाना है, प्रोजेक्ट का डेमो क्लाईंट को देने के लिए।

यह खबर सुनकर तो मानो मैं खुशी से उछल पड़ा, आखिर मेरी रोशनी से मिलने की तमन्ना जो पूरी होने वाली थी और यह बात मैंने रोशनी को बताई कि मैं तीन दिन के लिए पुणे आ रहा हूँ तो यह खबर सुन कर वह भी खुश हो गई, उसने मुझे अपने घर का पता बताया और मिलने के लिए बुलाया।

अगले दिन मैं ट्रेन पकड़कर पुणे के लिए रवाना हो गया, कंपनी ने एक होटल में मेरे रहने का इंतजाम कर रखा था और होटल भी पुणे स्टेशन के बगल में था तो मैंने रोशनी को होटल में मिलने के लिए कहा।

उसने हिचकिचाते हुए कहा- टाईमिंग मैच नहीं हो रही है, सुबह मेरे लेक्चर्स होते हैं और शाम को अपनी रूममेट्स के साथ रहती हूँ। उसकी बात सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे मेरी उम्मीदों पर किसी ने पानी फेर दिया हो।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, बट डू समथिंग ! मैं तुमसे मिलने के लिए बेचैन हूँ और मैं भी जानता हूँ कि तुम भी बहुत बेचैन हो।

आप लोग तो जान ही गए होंगे कि हम दोनों क्यों इतने मिलने के लिए बेचैन थे।

मैं क्लाईंट को डेमो देकर दोपहर तक होटल में आ गया था और आराम कर रहा था, तभी मेरा फ़ोन बजा, फ़ोन रोशनी का था, रोशनी ने मुझसे मेरे होटल का नाम-पता पूछा और बोली कि वह आ रही है मुझसे मिलने।यह सुन कर एक बार फिर मेरे अरमान जाग गए और मैंने कमरे को थोड़ ठीक किया और उसका इन्तजार करने लगा। फिर आधे घंटे बाद होटल के नीचे आकर उसने मुझे कॉल किया और नीचे आने को कहा। मैं नीचे गया उससे मिलने और उसको जब मैंने देखा तो मैं तो एकदम से पागल हो गया कुछ पल के लिए, उसने काला टॉप और नीली जींस पहनी थी, इतनी ज्यादा खूबसूरत तो नहीं थी लेकिन टाईट टॉप एंड जींस में उसके बूब्स और उसकी गांड एक दम धमाल लग रही थी। उसकी पूरी बॉडी एक दम जीरो फिगर थी।

ऐसी लड़की के साथ हर लड़का सेक्स करना चाहेगा।

मैं उसके थोड़ा और पास गया और कुछ पल के लिए उसे देखता रहा और तब वह हंस कर बोली- क्या हुआ? आपको लगता है कुछ जोर का सदमा लगा है?

तो मैंने कहा- सदमा तो लगा है जी ! वो भी बहुत जोर का !

तो वह हंसने लगी। फिर मैंने उसे कमरे में चलने का आमंत्रण दिया और वह मेरे साथ चल पड़ी।

अब हम दोनों कमरे में आ चुके थे, मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और हम सोफे पर बैठ कर बातें करने लगे यहाँ-वहा की। फिर मैंने समय न बर्बाद करते हुए पूछ ही लिया कि कभी किसी से ऐसे मिली हो?

तो उसने कहा- नहीं फर्स्ट टाइम किसी अनजान दोस्त से मिल रही हूँ !

फिर मैंने बात को बढ़ाते हुए कह दिया- यह अजनबी दोस्त तुम्हें अब जिन्दगी भर याद रहेगा।

तो उसने मेरी भावनाओं को भांप लिया और मुस्कुराने लगी।

हम दोनों सोफे पर बैठे हुए थे और बातें कर रहे थे, लेकिन जो बात हम दोनों करना चाहते थे वह बात समझ नहीं आ रही थी कि शुरुआत कहाँ से करें।

फिर तभी अचानक उसका पैर मेरे पैर से टकरा गया तो उसने कहा- सॉरी !

मैंने कहा- सॉरी मत बोलो, मैं तो खुशनसीब हूँ कि आपके खूबसूरत पैर मेरे पैरों से टकराए।

तो वह हंसने लगी और बोली- आप बड़े मजाकिया हो !

तो मैंने कहा- मैं तो बहुत कुछ हूँ जी !

और मैं उसके दोनों हाथों की उंगलियों को पकड़ते हुए खड़ा हुआ और वह भी मेरे साथ में खडी हुई और हम दोनों एक दूसरे के आँखों में कुछ पल के लिए देखने लगे, मानो बरसों के बिछड़े हुए हम आज मिल रहे हो। फिर मुझे देखते देखते उसने मुझे बाहों में पकड़ लिया। और मुझे अपनी बाहों में जोर से जकड़ लिया और मैंने भी उसका साथ दिया, अब हम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़े हुए थे और 'आय लव यू' 'आय लव यू' कह रहे थे।

फिर कुछ देर के बाद हम दोनों ने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की और मैंने फिर से उसकी आँखों में देखते हुए उसके माथे को चूम लिया तो उसने मुझे फिर से बाहों में ले लिया।

हम दोनों तो पहले से ही सेक्स के लिए तैयार थे, बस मौका तलाश रहे थे कि शुरु कैसे करें। अब तो हमारी शुरुआत भी हो चुकी थी तो देर किस बात की थी, मैंने उसका माथा चूमते हुए अपने होंठ उसके होंठों पर सटा दिए और एक जोरदार चुम्बन किया और उसने भी मेरा साथ दिया।

एक बार फिर हम एक दूसरे की आँखों की गहराइयों में खोने लगे। फिर उसने मेरे सिर को पीछे से पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए। अब वह पागलो की तरह मेरे होंठों को चूसे जा रही थी और मैं उसका साथ दे रहा था।

फिर मैं उसको दीवार के पास ले गया और उसको दीवार से उलटा चिपका दिया और उसकी टॉप को थोड़ा ऊपर उठा कर उसकी चिकनी कमर को धीरे धीरे चाटने और चूमने लगा।

अब मैंने उसकी गर्दन और पीठ को पीछे से चूमना शुरू किया और उसके पूरे बदन पर हाथ फेरने लगा। फिर मैंने अपने लंड को पैंट के अन्दर से निकाला और उसकी जींस के ऊपर से उसकी गांड में सटा दिया और कपड़ो के ऊपर से ही अपने लण्ड को उसकी गांड पर रगड़ने लगा। ऐसा करने से वो एकदम से आह्ह... उम्म्म... आआह्ह्ह... आह्ह्ह.... की आवाजें निकालने लगी।

फिर मैंने उसका चेहरा अपनी तरफ किया और उसे किस करने लगा। फिर करीब 5 मिनट की किसिंग के बाद मैंने उसको बेड पर लिटा दिया, फिर मैंने उसके माथे को चूमा, फिर गर्दन को, फिर उसके कान को हल्का सा काटा जिससे उसके मुँह से आह्ह्ह... की आवाज निकल गई।

फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ सटा दिए और उसकी जीभ को अपनी जीभ से चाटने लगा, चूसने लगा।

हाय क्या रसीली जीभ थी उसकी !

हम दोनों की जीभ एक दूसरे से ऐसे टकरा रही थी मानो जैसे दो तलवारें आपस में लड़ रही हों। उसके होंठ और जीभ इतने रसीले थे कि क्या बताऊँ ! मन तो कर रहा था कि उसके होंठ और जीभ को काट खाऊँ। अब उसके होंठों को आज़ाद करता हुआ मैं थोड़ी देर उसकी गर्दन को चूमता रहा और फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी गोल चूचियों पर रख दिया और उनको मसलने लगा।

हाय, क्या चूचियाँ थी उसकी ! एक बार हाथों में लेने के बाद तो उनको छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था। मेरे हाथ का एहसास पाते ही उसकी चूची और फूल गई और उनके निप्पल एकदम नुकीले हो गए।

अब मैं कुछ देर तक उसके होंठों को चूमता रहा और चूचियों को दबाता रहा और वह बस ऊम्म्म.... उफ्फ...उम्म की आवाजें निकालती रही। फिर मैंने उसके टॉप को और उसकी जींस को उसके बदन से अलग किया। उसने काली ब्रा-पैंटी पहन रखी थी जो उसके गोरे बदन पर एकदम कमाल लग रही थी। उसने अब मुझे बेड पर लिटा दिया और…

कहानी जारी रहेगी।

sunil_4u1@hotmail.com

पार्टी की रात


प्रेषक : गौरव कुमार

दोस्तो,

आप सबको प्यार भरा नमस्कार ! मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ तो सोचा कि आज मैं भी अपने बारे में लिखूं। मेरा नाम गौरव कुमार है, मैं नॉएडा में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में ऊँचे पद पर काम करता हूँ।

मेरी दोस्ती तो कई लड़कियों से हुई लेकिन ज्यादा कुछ नहीं हो पाया। एक लड़की मेरी ही कंपनी में एक इंजिनियर थी, उसका नाम शानू था और शायद वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी, वो मेरा बहुत ध्यान रखती थी जिससे मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी और शायद वो भी मुझे चाहने लगी थी लेकिन पहले तो मेरी उस पर ऐसी कोई नज़र नहीं थी लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे ही मेरा आकर्षण भी उसकी तरफ बढ़ता चला गया क्योंकि मैं भी अकेला ही रहता था।

फिर एक दिन मुझे पता चला कि दो दिन बाद कंपनी की होली के त्यौहार की छुट्टी है और कंपनी में पार्टी है तो मैंने सोचा कि हो सकता है इस दिन का कुछ फायदा मुझे मिल जाये और वो दिन आ ही गया।

कंपनी की पार्टी रात को देर से ख़त्म हुई, मैं कंपनी से गाड़ी निकल ही रहा था कि पीछे से आवाज़ आई।

मैंने पीछे मुड़कर देखा तो शानू मेरे पीछे थी। मेरे तो जैसे दिल की मुराद ही पूरी हो गई।

वो मेरे पास आई और पूछा- कहाँ जा रहे हो?

मैंने कहा- रूम पर जा रहा हूँ।

तो मुस्कुराई और कहा- मुझे नहीं लेकर चलोगे?

मैंने कहा- की नेकी और पूछ पूछ।

मुझे तो लगा कि जैसे मेरी हर मुराद पूरी हो गई हो। मैं उसे लेकर जैसे ही कंपनी से निकला और वो मुझे देख कर हंसने लगी। मैं उसका इशारा समझ गया। मैंने उससे पूछा- तुम कहाँ जाओगी?

तो उसने कहा- मेरी एक सहेली यहाँ नजदीक ही रहती है, मैं वहाँ चली जाऊँगी।

तो मैंने कहा- अगर तुम बुरा ना मानो तो मेरे साथ चल सकती हो, मैं भी अकेला ही रहता हूँ और मेरे साथ रुक सकती हो जिससे तुम्हें सुबह आने में भी परेशानी नहीं होगी।

उसने कहा- आपको परेशानी नहीं होनी चाहिए, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

तो मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं है, तुम मेरे साथ रुक सकती हो।

इतने पर कह सकते हैं कि वो भी सेक्स चाहती थी और शायद मैं भी चाहता था और थोड़ी ही देर में हम मेरे फ्लैट पर पहुँच गए।

वहां पहुंच कर हम अंदर गए, मैंने उसको चाय-कॉफ़ी के लिए पूछा तो उसने मना कर दिया।

और हमने खाना तो खा ही लिया था।

अब ड्रेस बदल कर मैंने उसे ड्रेस बदलने के लिए अपना लोअर और टीशर्ट दे दिया। वो जैसे ही ड्रेस बदल कर बाहर निकली, मैं उसको देखता ही रह गया। वो उन कपड़ों में क्या क़यामत लग रही थी। वो बाल झटक कर बैठ गई। मुझ पर तो जैसे उसका नशा सा छाने लगा। मैं बस उसे देखता ही जा रहा था।

उसने मुझे कहा- ऐसे क्या देख रहे हो?

मैंने कहा- आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो। जैसे कोई परी आसमान से धरती पर अभी अभी उतरी हो !

मेरा ऐसा कहते ही वो शरमाने लगी और कहने लगी- आप मजाक कर रहे हो !

मैंने कहा- नहीं, आज तुम सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो और आज तुम्हें प्यार करने को दिल करता है।

वो गुस्सा होने लगी और कहने लगी- मैं जा रही हूँ। मैं तो आपको बहुत सीधा और अच्छा समझती थी। लेकिन आपने मेरा दिल तोड़ दिया।

वो जैसे ही कपड़े उठाने के लिए आगे बढ़ी मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया और अपनी बाँहों में दबोच लिया।

वो मुझसे छुड़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन नाकामयाब रही। मैंने उसे अपनी तरफ घुमाया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। उसने इसका अबकी बार कोई विरोध नहीं किया। लगभग दस मिनट तक मैं उसके होठों का रसपान करता रहा, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। उसने अपने हाथों की पकड़ मुझ पर बढ़ा दी थी। मैं अब समझ चुका था कि देर करना ठीक नहीं है, लोहा गर्म है और चोट मारना ठीक है।

और मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया। वो मुझे नशीली नज़रों से देख रही थी। मैं भी बिस्तर पर लेट गया और उसे अपने साथ लेटा लिया और उसके चूचों को छेड़ने लगा। उसकी आँखें बंद होने लगी थी और वो अजीब सी आवाजें निकाल रही थी- सी सी सी सी आह आह आह हा हा हा माँ मैं मर जाऊँगी।

फिर मैंने उसके कपड़े निकालने शुरु कर दिए। पहले उसकी टीशर्ट उतार दी और उस पर अपना कब्जा कर लिया।

फिर धीरे धीरे से उसको सीधा किया और तब मैं उसके गुप्तांगों को छू रहा था। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे कहा- आज तक मैं कुंवारी हूँ ! मुझे आज तक किसी ने छुआ तक नहीं है। आज मैं अपने आप को आप को सौंप रही हूँ क्योंकि मैं आपको प्यार करती हूँ।

मैंने कहा- प्यार तो मैं भी तुम्हें करता हूँ इसलिए आज तुम्हारे साथ हूँ लेकिन जैसे तुम्हें पता है मैं शादी शुदा हूँ, मैं सिर्फ तुमसे प्यार कर सकता हूँ, तुम्हें अपनी जिन्दगी में कोई जगह नहीं दे सकता, तुम सिर्फ मेरे दिल में रहती हो। उसने कहा- मुझे पता है, मैं आपकी जीवन साथी नहीं बन सकती, इसलिए आज मैं अपने आप को आपके हवाले कर रही हूँ, अगर जिन्दगी मैं कहीं दुबारा मिले तो हम एक दूसरे को नहीं भूलेंगे।

फिर मैंने उसकी चूत को छुआ, उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मैं उसको और गर्म करना चाहता था।

फिर धीरे धीरे उसका लोअर भी उतार दिया और मैं उसकी चूत को सहला रहा था।

उसके मुख से अजीब सी सिसकारी निकली और उसने कहा- मुझे और मत तड़पाओ। फिर उसने मेरे कपड़े उतारने शुरु कर दिए।

मैंने भी देर न करते हुए अपने सारे कपड़े उतरवा दिए और अपना लंड उसके हाथ में थमा दिया।

एक बार तो उसको देखते ही डर गई फिर वो बच्चों की तरह उससे खेलने लग गई। वो उसे लोलीपोप की तरह चूस रही थी। थोड़ी देर तक वो ऐसे ही चूसती रही, फिर उसने अचानक कहा- बस बहुत हो गया, अब और सहन नहीं होता !

मैंने उसे सीधा करके लेटा दिया और अपने लंड महाराज को उसकी चूत पर रखा और हल्का सा अंदर डालने की कोशिश की।

जैसे ही थोड़ा सा अन्दर गया, उसके मुँह से चीख निकल गई।

फिर मैंने उसे चूमना शुरु कर दिया।

जैसे ही मुझे लगा कि उसका दर्द कुछ कम हुआ, मैंने एक झटका और लगा दिया और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। तब मुझे एहसास हुआ कि वो सच में आज तक कुंवारी है।

मैं उसे धीरे से सहला रहा था। फिर मैंने थोड़ी देर में एक और जोर का झटका लगा दिया और लंड अन्दर तक चला गया। जैसे ही लण्ड पूरा अन्दर गया।

वो रोने लगी और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। फिर मैं थोड़ी देर तक रुका ताकि उसका दर्द कम हो जाये और ऐसा ही हुआ।

थोड़ी देर बाद उसे मज़ा आने लगा और वो भी चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी और कह रही थी- और जोर से चोदो ! और जोर से ! फिर न जाने कब मौका मिले ! इसलिए मैं आज जी भर के चुदना चाहती हूँ।

मैं उसे जोर जोर से चोद रहा था, पूरे कमरे में पच्च-पच्च की आवाज़ आ रही थी।दस मिनट बाद वो झड़ने वाली थी, उसने कहा- मैं तो गई।

और एक दम से ढीली पड़ गई। मैं जोर जोर से धक्के लगा रहा था और पंद्रह मिनट बाद भी मैं झड़ने लगा था।मैंने कहा- क्या करूँ? कहाँ छोड़ूँ?

उसने कहा- अंदर ही छोड़ दो जिससे मेरी चूत को शांति मिल जाये।

मैंने अंदर ही सारा माल निकाल दिया, फिर मैंने उसे रात में उसे पांच बार चोदा, फिर हम थोड़ी देर सो गए और जैसे ही सुबह उठे तो उसने कहा- आज कंपनी जाने का दिल नहीं कर रहा।

मैंने कहा- ठीक है, छुट्टी ले लेते हैं।

और मैंने और उसने ऑफिस में फ़ोन कर दिया, फिर नहा-धोकर खाना खाया और फिर दिन और रात में चुदाई में लगे रहे।

दोस्तो, यह थी मेरी सच्ची कहानी। फिर उसकी अन्य सहेलियों को मैंने कैसे चोदा यह मैं अगले भाग में लिखूंगा और अभी आप सब दोस्तों की मेल का इंतज़ार करूँगा। मुझे आप सबके मेल्स का इंतज़ार रहेगा।

kmrgaurav1984@gmail.com

लिफ़्ट देकर गांड को लिफ्ट दिलवाई


प्रेषक : सनी गांडू

प्रणाम जी, सबको मेरा प्रणाम !

लो आ गया आपका प्यारा सा सनी अपनी गांड की लेटेस्ट ठुकाई करवाकर जनता के बीच !

हाज़िर हूँ, वैसे जनता से ही ठुकता हूँ मेरे बहुत प्रीतम हैं लेकिन मुझे किसी एक के लंड से संतोष कहाँ आता है, चाहे कई हाथ में हों पर मुझे नया लंड लेने का दिल हो तो मैं शिकार करने निकलता हूँ।

मैं बाय पास रोड पर मोटर साइकिल लेकर निकला था कि मुझे किसी ने हाथ दिया, एक चौक में खड़े एक तकड़े से बन्दे को देखा, पहले नहीं रुका आधा किलोमीटर आगे गया, सोचा देखना चाहिए, बंदा सही माल लगता है, सांवले रंग का ! पंजाबी नहीं था, यह तो पक्का था।

मैंने यू-टर्न मारा, वापस चौक से गोलाई काट फिर से उसी सड़क पर, उस सड़क की परेशानी यह है कि वहाँ ऑटो नहीं चलते, दूसरा वहाँ लोग बहुत कम कम होते हैं।

उसने मुझे गौर से देखा कि यह तो वही था जो अभी निकल गया था, उसने दुबारा हाथ किया लेकिन फिर रुक गया कि शायद इसने कौन सी लिफ्ट देनी है।

मैं रुक गया वहाँ- तुमने मुझे हाथ दिया था लिफ्ट के लिए?

बोला- हाँ !

"कहाँ जाना है?"

बोला- चौथे चौक में उतरना है।

"बैठ जा !"

बोला- मेरा साथी भी है !

"किराया भी लगेगा, दो का दे दोगे?" मैं मुस्कुराया।

बोले- वहाँ उतार देना, ले लेना किराया आप ! वैसे भले चंगे दीखते हो ! भला आपको किराया क्यूँ लेना?"

"किराया किसी भी तरह का होता है !"

दोनों बैठ गए, मैं जानता था कि आगे पुलिस चौकी नहीं थी, तभी ट्रिप्ले कर ली।

वो मेरे साथ सट कर बैठा, पीछे उसका साथी। थोड़ा आगे गया तो मैंने गांड का दबाव पीछे की तरफ दिया, उसको शायद समझ नहीं आई लेकिन जब थोड़ा उठकर मैंने गांड को धकेला तो मैंने नोट किया कि उसका लंड हरकत में था।

बोला- बाबू जी, क्या कर रहे हो? पहले ही पीछे जगह कम है।

मैंने कहा- जब कुछ करना हो तो यार, जगह बन ही जाती है। मुझे पकड़ कर बैठ जा !

मैंने टीशर्ट थोड़ी उठाई, उसके दोनों हाथ घुसवा दिए जब उसके हाथ मेरे नर्म नर्म लड़की जैसे कोमल मम्मो पर गए, मैंने एक हाथ पीछे ले जा उसके लंड को टटोला।

पीछे वाला बोला- सही कहते हो।

बोला- बाबू जी, आपके तो लड़की जैसे हैं, कैसे हो गए इतने बड़े?

मैंने बाईक बहुत धीमी कर रखी थी ताकि मंजिल जल्दी ना आये।

"तेरे जैसे मर्दों ने मसल मसल कर बड़े कर दिए !"

उसके तेवर बदल गए, मेरे निप्पल को मसलता हुआ बोला- साले, तुम तो मस्त माल हो।

दूसरा बंदा पीछे से ही हाथ बढ़ा कर देखना चाहता था, मैंने कहा- साले, तुझे क्या हो रहा है?

बोला- जो तुझे हो रहा है।

मैंने बाईक किसी गाँव की तरफ जाते कच्चे रास्ते उतार दी। एक दो किलोमीटर आगे जाकर गन्ने के काफी खेत थे, बोले- किधर जा रहे हैं हम?

"तुझे जैसे कुछ मालूम नहीं? कमीनो इस पीछे वाले को हाथ आगे लेकर आने में दिक्कत थी सो इस तरफ ले आया !"

"हाय मेरे गांडू ! सब समझ गया।

बाईक थोडा आगे लगा कर हम खेत में गए, लगता था जैसे वहाँ ऐसे काम होते रहते थे, खेत के बीचम बीच गन्ने काट कर दायरा सा बना रखा था।

"आज जाओ !"

शाम हो रही थी, थोड़ा अँधेरा था, पीछे वाला जयादा उछल रहा था इसलिए मैंने उसके लंड को दबोच लिया। दोनों खड़े रहे, मैंने घुटनों के बल होकर उसकी जिप खोली, कच्छे को सरकाया, उसका काला लंड देख मेरी गांड गीली होने लगी।

मैंने पागलों की तरह उसका लंड चूसना चालू किया।

दोनों हैरान थे !

उसका चूसते चूसते मैंने दूसरे का लंड निकाला, उसका तो पहले से ज्यादा बड़ा, रसीला लगा,

मैंने एक लंड छोड़ा, दूसरे का मुँह में ले लिया। पहले वाले के लंड को मुठ में लेकर हिलाता रहा।

"साली छिनाल ! अपनी लड़की जैसे चूची दिखा !"

मैंने टीशर्ट उतार दिया।

मेरे मम्मे देख दोनों पगल हो गए- साली हमसे शादी कर ले, खुश रखेंगे !

"कमीनो, मैं रंडी हूँ दोनों की ! मसल डालो, बुझा दो मेरी गांड की प्यास !"

मैं लेट गया वो मुझ पर सवार होकर मेरे निप्पल को चूसने लगा, उसका लंड मेरी जांघों में रगड़ रहा था। मैंने टांगें खोली, वो समझ गए, बीच में बैठ उसने टांगें कंधों पर रख सुपारा मेरे छेद पर रख सरकाया लेकिन फिसल गया।

"रुक-रुक !"

मैंने जेब से कंडोम निकाले- यह डाल !

कंडोम की चिकनाई से उसका पूरा लंड घुस गया। दस मिनट उसने मुझे जम जम कर पेला, जब उसका निकलने वाला था, उसने खींचा कंडोम उतारा मेरा चेहरा भर दिया।

फिर दूसरे ने मुझे दस मिनट घोड़ी बना कर ठोका।

कसम से शाम रंगीन हो गई थी।बोले साले- चिकने खुश है? मिल गया तुझे किराया? अगर और चाहिए तो चौक से थोड़ा आगे कमरा है। चल वहाँ, हम रहतें है। फिर तुम कभी भी चुदने आ जाया करना।

उनके कमरे में गए, दो कमरे थे, एक रसोई थी, वहाँ उनका तीसरा साथी था, बोले- इससे भी मजे ले ले !

उसने अपना लंड निकाला और सहलाने लगा। उसका लाल सुपारा देख मैंने मना नहीं किया।दोस्तो, उस दिन के बाद मैं तीन बार उनके कमरे में गया हूँ।

जल्दी अपनी अगली चुदाई लेकर आऊँगा।

आपका प्यारा गाण्डू सनी

dick_lover19@yahoo.com

सुहागरात


प्रेषक : उमेश कुमावत

दोस्तो, मैं अपनी सुहागरात की सच्ची कहानी ज्यों की त्यों लिख रहा हूँ, इसमें कोई भी बनावटी बातें नहीं हैं।

जब मेरी शादी हुई तो सुहागरात को मेरे घर वालों ने मुझे अपने कमरे में भेज दिया। वह मेरे पत्नी दीवार के सहारे खड़ी हुई थी।

मुझे देख वो मेरे पास आई और मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया।

वो एकदम परी लग रही थी, उसके बालों में मोगरे का गजरा लगा था और बड़ी भीनी महक बिखेर रहा था।

वो बहुत ही शरमा रही थी। मैंने उसके माथे पर चुम्बन लिया और उसके गहने उतारे। फिर जैसे ही मैंने उसके कच्चे बदन को हाथ लगाया तो मुझे करेंट सा लगा, ऐसा ही कुछ हाल उसका भी था। सच बताऊँ तो मुझे कुछ भी नहीं पता था कि आगे क्या करना है।

इससे पहले मैंने कभी सेक्स का कोई अनुभव नहीं किया था। हाँ कभी-कभार दोस्तों के साथ पोर्नो ज़रूर देखे थे पर उन सबके ज्ञान का असल में कोई मतलब नहीं होता है, आपको खुद ही सच्चा अनुभव लेना पड़ता है। पोर्नो में अक्सर आदमी का काफी देर बाद स्खलित होता है और औरत की योनि में भी कोई गीलापन नहीं होता है, मुझे भी यही सब पता था।

और एक बात का और डर था कि पता नहीं मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट भी कर पाउंगा या नहीं, कितनी देर तक मैं उसके साथ सेक्स में टिक पाऊँगा।

जब कभी मैंने हस्तमैथुन किया था तो मेरे लिंग के ऊपरी भाग ज्यदा सेंसिटिव होने के कारण मैं उसे कभी ज्यादा छू नहीं पाया। यही बात मुझे परेशान कर रही थी कि मैं अपनी पत्नी के साथ सेक्स कैसे कर पाऊँगा।

हम दोनों धीरे से बिस्तर पर बैठ गए, मैंने कांपते हाथों से उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए।

यह अनुभव बहुत ही शानदार था। उसका पूरा बदन गर्म हो रहा था। ब्रा का रंग हल्का गुलाबी था और मेरी पत्नी का बूब्स साइज़ 34 का था।

हम दोनों अब बेड पर लेट गए। वो मुझसे एकदम सट गई। हम दोनों कुछ भी नहीं बोल रहे थे। एक अजीब सी हलचल हो रही थी मन में, मुझे यह डर था कि वो बुरा न मान जाए या फिर मुझ से कोई गलती न हो जाए।

जब हम दोनों बेड पर लेट गए तो हम सामने से एक दूसरे के करीब थे। मैंने थीरे से उसके ब्रा पर हाथ लगाया तो एक झटका सा लगा क्योंकि यह सब पहली बार हो रहा था। उसके बूब्स बहुत ही सख्त थे। फिर उनके ब्रा से मुझे एक गुलाब का फूल मिला तो उसने बताया की यह मेरे लिए था।

धीरे धीरे मैंने उसके पूरे बदन को स्पर्श किया तो मन में जिज्ञासा हुई कि योनि को भी देखूँ कि वो असल में कैसी होती है?

जब मैं योनि पर हाथ ले कर गया तो उसने मेरे हाथ को हटा दिया। मुझे लगा कि उसे अच्छा नहीं लगा तो मैंने दोबारा हाथ नहीं लगाया।

उसके शरीर की बनावट इतनी सुन्दर थी कि मुझे उसे हाथ लगाने में भी सिरहन हो रही थी। उसके पैर को मैंने छुआ, जांघ को स्पर्श किया पर योनि को नहीं हाथ लगाया।

फिर मैंने धीरे से उठ कर अपने लिंग पर कोंडोम लगाया और उसके ऊपर आ गया मैंने उससे पूछा- कहाँ अन्दर डालूँ?

तो उसने अपने हाथ से मेरा लिंग शर्माते हुए पकड़ा और योनिद्वार पर रखा। मैं यह अनुभव भूल नहीं सकता कभी भी। मुझे नीचे की तरफ कुछ गीला सा लगा तो तब मुझे पता लगा कि योनि कितना गीली होती है सेक्स के समय।

मैंने धीरे से योनि में अपना लिंग डाला तो मुझे योनिद्वार संकरा लगा लेकिन योनि गीली होने के कारण लिंग आधा अन्दर चला गया। अभी भी मुझे संकरापन महसूस हो रहा था। जैसे ही लिंग ने योनि में प्रवेश हुआ तो मेरे पत्नी की चीख निकल गई और मैं डर गया कि कही कोई समस्या खड़ी ना हो जाए !

पर मैंने थोड़ी देर लिंग को स्थिर रखा और पूछा- दर्द अभी भी हो रहा है क्या?

मेरे पत्नी ने काफी देर तक कुछ नहीं बोला, फिर थोड़ी देर में कहा- आप अपना काम कर लो, मुझे अब दर्द नहीं हो रहा।

मैंने धीरे से लिंग और अन्दर सरकाया। पूरी योनि एकदम कसी हुई थी और बहुत ज्यादा मात्रा में गीलापन हो रहा था।

मेरे लिंग में थोड़ा दर्द हुआ क्योंकि यह मेरा पहला अनुभव ही था। फिर मैंने धीरे धीरे से लिंग को हिलाना चालू किया लेकिन घबराहट के कारण मुझे कुछ भी पता नहीं चल रहा था, लेकिन असीम आनन्द आ रहा था।

2-3 मिनट बाद मुझे लगा कि मैं स्खलित होने वाला हूँ तो मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि उसका हो गया तो उसने केवल अपना सर हिला दिया। पर इतना तो मुझे पता चल गया था कि उसका अभी स्खलन नहीं हुआ है क्योंकि उसे कुछ हुआ ही नहीं था।

तब मैंने उसको भी मज़ा देने की सोची, फिर मैंने उसकी ब्रा उसके स्तनों से ऊपर सरका कर उन्हें अनवृत किया, क्या बताऊँ, उसके स्तन इतने सख्त थे कि बस मज़ा आ गया। निप्पल एकदम गुलाबी थे और बिल्कुल तने हुए। मैंने एक निप्पल को मुंह में ले लिया, ऐसा लगा कि जन्नत कि सैर कर रहा हूँ। एकदम सख्त निप्पल था।

योनि से रस वर्षा हो रही थी, मैं रस वर्षा को अपने लिंग पर महसूस कर सकता था क्योंकि वो मुझे योनि पर हाथ ही नहीं लगाने दे रही थी।

फिर मैंने ठान लिया कि आज तो योनि को तो मैं चूम कर ही रहूँगा। मैं उसकी टांगों के बीच बैठ गया और उसका पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया। उसने थोड़ा मना किया पर मैंने कर दिया। उसके बाद मन में अजीब सी हलचल हुई, जैसे मैंने उसकी योनि को देखा, एकदम गीली, बिल्कुल क्लीन शेव और छोटी सी अनछुई कोमल कली। योनि का रंग थोड़ा गहरा था, उसमें से पता नहीं कैसी खुशबू आ रही थी जिसे सूंघ कर मुझे अच्छा लग रहा था।

जैसे ही मैंने योनि पर हाथ लगाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, लेकिन मैं भी कहाँ मानने वाला था। अपनी जीभ से मैंने उसकी योनि का ऊपरी उभरा हुआ हिस्सा छुआ तो मुझे अच्छा लगा पर योनि का गीलापन देख कर एक बार तो मुझे हिचकिचाहट हुई। मैंने उसके पेटीकोट से सारा गीलापन साफ़ कर दिया और फिर से अपनी जीभ से योनि को चाटने लगा। योनि का स्वाद कुछ नमकीन था। जैसे जैसे में योनि को जीभ से सहलाता वैसे ही योनि में गीलापन और ज्यादा हो जाता।

थोड़ी देर बाद उसने भी अपने कूल्हे उठा कर यह संकेत दे दिया कि उसे भी मज़ा आ रहा है। उसका यह मज़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा था और कुछ देर बाद वो मेरा नाम जोर से लेकर स्खलित हो गई।

यह थी दोस्तो, एक सच्ची बिना बनावट की मेरी सुहागरात की कहानी।

ukumawat@gmail.com

पड़ोसन दीदी-2


प्रेषक : सन्दीप दहिया

वो जिस्म की आग से तप रही थी। उसने मुझे अपनी ओर खींचा जैसे कह रही हो- मेरे जिस्म में समा जाओ !

मैंने उसके जिस्म को ऐसे चाटना शुरु किया जैसे वो कोई लॉलीपॉप हो !

फिर थोड़ी देर बाद घंटी बजी और हम दोनों डर गए कि आज तो मर गए, हमें लगा कि उसके मम्मी-पापा आ गये हैं, उसने अपने कपड़े पहने और बाल ठीक किये, मुझे कहा- अपनी किताब खोल कर बैठ !

मैंने वैसा ही किया। वो दरवाजे पर गई।

जब दरवाजा खुला तो मेरे सामने मेरी मम्मी थी। मैं तो सच में डर ही गया कि कहीं मम्मी को शक तो नहीं हो गया और चारू के चेहरे पर भी उदासी छा गई।

मम्मी मेरे पास आई, बोली- बेटा पढ़ कर जल्दी आजियो, कुछ काम है।

मैंने कहा- बस आने वाला हूँ थोड़ी देर में।

और फिर मम्मी चली गई।

चारू के मुंह से 'ओह माय गोड' निकला और हंसने लगी, बोली- आज तो मर ही गए थे !

मैंने कहा- हाँ, बच तो गए !

तो मैंने उसे फिर से पकड़ लिया और उसके होंटों को चूसने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद वो बोली- संदीप अब मन नहीं है, बाद में करेंगे।

तो मैंने उसे छोड़ दिया और कहा- जैसा आपकी मर्जी !

फिर दो महीनों के बाद एक दिन मेरे घर कोई न था तो मैं उसके घर गया। वहाँ उसकी मम्मी थी, तो मैंने आंटी को कहा- आँटी चारू को मेरे घर भेज देना, नेट चलवाना है।

तो आंटी बोली- बोल दूंगी।

और फिर वो थोड़ी देर बाद मेरे घर आ गई। मैंने उसे अपने बेडरूम में बुलाया और कहा- आज मौका है।

वो बोली- मतलब?

मैंने कहा- मैडम, आज घर पर कोई नहीं है।

तो वो बोली- नहीं, मुझे नहीं करना ये सब !

जब मैंने कारण पूछा तो नहीं बताया, तो मैंने उसे पकड़ कर चूमना शुरु कर दिया और बेड पर लिटा दिया।

मैंने जैसे ही उसकी सलवार उतारी तो वो रोने लगी और बोली- आज नहीं संदीप !

मैंने कहा- क्यूँ नहीं?

तो उसने बताया- मेरे मेंसेस आने वाले हैं।

मैंने कहा- कोई बात नहीं ! मेरे पास कंडोम है।

तो बोली- नहीं, फिर कभी।

तो मैंने गुस्से में आकर उसे कह दिया- चल भाग जा यहाँ से ! साली, पागल इतनी डरती है? मैं तुमसे नफरत करता हूँ।

तो दोस्तो, वो बहुत जोर से रोने लगी, इतनी जोर से कि आवाजें बाहर जा रही थी।

तो मैंने उसे चुप किया और उसके होंटों को अपने होंटों में दबा लिया फिर वो रोते रोते बोली- तो कर लो पर आराम से ! मुझे डर लगता है यह सब करने में।

तो मैंने कहा- डर कैसा?

तो बोली- मैंने फिल्मो में देखा है कि बहुत गन्दी तरह से करते हैं वो, प्लीज़ तुम ऐसे मत करना।

तो मैंने हंस कर कहा- तुम ब्लू फिल्म्स की बात कर रही हो?

तो बोली- हाँ यार।

तो मैंने अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म चला दी, उसने अपने हाथ अपनी आँखों पर रख लिए।

मैंने उसके हाथ पकड़ लिए और जब फिल्म ख़त्म हुई तो मैंने पूछा- कैसी लगी?

तो वो कुछ नहीं बोली।

मैंने देखा तो उसकी नजरें झुकी थी और उसका चेहरा बिल्कुल लाल हो गया था।

मैंने समय न ख़राब करते हुए उसके बालों को सहलाया और उसके बाल खोल दिए, वो अब और भी सुंदर लग रही थी।

फिर मैंने उसके गालों को चूसना शुरु किया। वो अब भी कुछ न बोल रही थी, मैं समझ गया था कि अब वो सेक्स में पागल हो चुकी है, मैंने उसे पकड़ कर बेड पर लिटा दिया और उसके चूचों को दबाने लगा।

उसके मुँह से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थी- ऊह्ह आ आआ !

मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरु किया और वो भी पागल होती जा रही थी, मेरा तो लंड फटने को हो रहा था। मैंने अपनी पैंट खोल कर उसका हाथ पकड़ के अपने लंड पर लगा दिया, उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे ऊपर-नीचे करने लगी।\

अब मुझे भी मजा आ रहा था।

चारू बोली- संदीप, तेरा तो लंड बहुत बड़ा है।

फिर हुई उसकी चुदाई शुरू, मैंने उसकी दोनों टांगो को उठाया, उनके बीच बैठ गया और उसकी चूत को पहले हल्के से उंगली से सहलाया और फिर उसके अंदर अपनी एक उंगली डाली। वो भी मजा लेने लगी। फिर मैंने अपनी दो उंगलियाँ डाली और उसके मुँह से आवाजें आनी शुरू हो गई- संदीप, बहुत दर्द हो रहा है, संदीप रहने दो !

मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने ५ मिनट तक किया और मैं देख रहा था कि वो मदहोश होती जा रही है। मैंने फिर उसकी गोरी गोरी गर्म चूत पर अपना मुँह लगा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा।

बस फिर क्या, उसके मुँह से आवाजें आनी शुरू हो गई- ऊह्ह्ह्ह आआ आआआअ !

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर हल्का सा झटका ही मारा था कि वो दर्द के मारे रो उठी।

मैं समझ गया कि वो कुंवारी बुर थी !

उसके मुँह से आवाज आई- संदीप मत करो, बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने उसकी एक न सुनी और पहले तो उसकी आराम से चुदाई की और आराम से झटके मारे और उसके होटों पर अपने होंट रख दिए और आराम से चोदने लगा।

थोड़ी देर में वो बोली- अब कण्ट्रोल नहीं होता, डाल दो सारा का सारा।

मैंने उसकी बात को मानते हुए अपना 7 इंच का लंड उसकी चूत में उतार दिया और वो जोर से चिल्लाई- हाई माँ मार दी साले ने !

बस मैं उसकी तरफ न देखते हुए उसे चोदता रहा और वो भी मेरा साथ दे रही थी।

मैं जोर जोर से झटके मार रहा था और चारु भी मेरा साथ दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे दर्द हो ही न रहा हो !

मैंने पूछा तो बोली- दर्द से बड़ी प्यास है ! पहले मेरी प्यास बुझ जाये ! प्लीज फाड़ डालो ! होने दो दर्द।

करीब 20 मिनट चोदने के बाद मैं झड़ गया और वो भी।

हम एक बिस्तर पर पड़े हुए गहरी सांसें ले रहे थे और काफ़ी देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

फिर वो बोली- संदीप, आई लव यू ! मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि तुम इतना मजा दे पाओगे क्यूंकि तुम मुझसे छोटे हो !

तो मैंने कहा- लंड तो बड़ा है न?

जब हम उठे तो देखा कि बिस्तर पर खून !

वो डर गई !

मैंने उसे समझाया कि ऐसा पहली बार में होता है, बस थोड़ी देर में सब ठीक हो जायेगा।

बस मैंने उसे दो बार और चोदा, अब उसकी शादी हो गई है और मैं बिल्कुल अकेला हूँ, मेरा तो लंड हर रोज तंग करता है कि मुझे चूत चाहिये।

मुझे जरूर बताना कि मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे ईमेल जरुर करना।

sandeepsharma0421@gmail.com

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
There was an error in this gadget